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गोल्फ

गोल्फ भी क्या खेल है। बस क्लब (club) से गेंद को मारते चलो। यह जगह फेरवे कहलाती है। आगे जा कर एक जगह छेद होता है। इसके चारो तरफ घास बहुत अच्छी तरह से कटी होती है। इसको ग्रीन कहते हैं। गेंद को इसी छेद में डालना होता है। इस खेल में १८ होल होते हैं यानि कि १८ फेयरवे। कुछ जगह केवल ९ ही होते हैं।

आपको अपने क्लब से गेंद को मारना पड़ता है और कम से कम बार मार कर होल में डालना होता है। इसकी गेंद भी खास तरह की होती। जिसके कारण यह ऊपर उठती है या घूमती है और यह सब भौतिक शास्त्र के बरनॉली सिद्धान्त के कारण होता है। इस सिद्धान्त के बारे में मुन्ने के बापू ने बेन्ड इट लाइक बेख़म की चिट्ठी में बताया है।

इस खेल में बहुत समय लगता है। मुझे तो यह खेल कभी समझ में नहीं आया पर पूरी दुनिया इसकी दिवानी है। मुन्ने के बापू भी दिवाने हैं पर समय आभाव के कारण ज्यादा खेल नहीं पाते हैं।

मैं भी कभी कभी इनके साथ गोल्फ कोर्स जाती हूं। मुझे यह खेल तो अजीब लगता है पर गोल्फ कोर्स पर जाना अच्छा लगता है। यह कस्बे की सबसे साफ सुथरी जगह है। सब तरफ हरा रंग। यहां पर पैदल चलने का अलग ही मजा है।

मुन्ने के बापू कहते हैं कि यह खेल जीवन में अनुकरण करने की बातों को सिखाता हैः

  • नम्र रहोः सिर झुका कर रखो सिर ऊपर न उठाओ। गेंद को क्लब से मारते समय आंखे हमेशा गेंद पर रखनी होती है। यह तभी हो सकता है जब सर नीचे हो। जब तक पूरा शॉट न लग जाय तब तक आंखें नीचे गेंद पर रहनी चाहिये नहीं तो शॉट बेकार कभी आपका क्लब गेंद के ऊपर से गुजर जायगा या फिर गेंद के पहले जमीन पर लग जायगा।
  • प्यार से रहोः गेंद को जोर से मारोगे तो शॉट बेकार हो जायगा। गेंद को प्यार से स्विंग से मारोगे तो वह उतनी दूर जायगी।
  • टेंशन मत लोः यदि गेंद को मारते समय आप तनाव में रहते हैं तो शॉट गड़बड़ हो जायगी। इसलिये टेंशन मत लो। शॉट मारने के बाद उसे भूल जाओ।


इस खेल में बहुत समय लगता है पर फिर मैं चाहती हूं कि ये इसे हमेशा खेले। कम से कम साफ वतावरण में तो रहते हैं कुछ कसरत तो होती है। इस खेल में उम्र का कोई तकाज़ा नहीं है। कम से कम मेरी सौत कंप्यूटर पर तो नहीं बैठेंगे। नहीं तो जब देखो कमरे में बैठे बैठे उंगलियां इसी पर थिरकती रहती हैं।

गोल्फ कोर्स तो सब जगह के सुन्दर होते हैं पर विदेश में तो इनकी सुन्दरता देखने लायक है। मुझे तीन साल पहले टोरंटो के यॉर्क विश्विद्यलय में एक सम्मेलन में रहने का मौका मिला था। वहां से हम लोग किचनर में एक गोल्फ कल्ब – शायद Rebel Golf Club, Kitchner – गये थे। यह कोर्स बहुत सुन्दर है। यहां पर हमारा दिन का खाना था। इसके आखरी ग्रीन के चारो तरफ पानी ही पानी था।



सबसे ऊंचाई पर गोल्फ कोर्स तो अपने ही देश में, गुलमर्ग में है। यह इस समय बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। श्रीनगर में एक अन्तरराष्ट्रीय स्तर का १८ होल का नया गोल्फ कोर्स बनाया गया है। यह बहुत सुन्दर है। परी महल से इसका दृश्य अनोखा लगता है।

श्रीनगर में नया अन्तरराष्ट्रीय स्तर का गोल्फ कोर्स


इस बार की सारी कापियां जच गयीं पर मुझे कोई कविता नहीं मिली जैसे कि पिछले साल मिल गयी थी।

[Creative Commons http://munnekimaa.blogspot.com/2007/06/golf.html]

August 1, 2007 - Posted by bestofhindi | Uncategorized | | 2 Comments

2 Comments »

  1. हिन्दी ब्लॉगिंग मे आपका स्वागत है।यदि आप लगातर हिन्दी मे ब्लॉगिंग मे करने का मन बनाते है तो आप अपना ब्लॉग नारद पर रजिस्टर करवाएं। नारद पर आपको हिन्दी चिट्ठों की पूरी जानकारी मिलेगी। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर हम आपसे सिर्फ़ एक इमेल की दूरी पर है।

    Comment by जीतू | August 8, 2007

  2. अरे वाह, इस चिट्ठी को पढ़ कर मजा आ गया।

    Comment by उन्मुक्त | December 30, 2008


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